Tuesday, April 7, 2009


रात आधी खींच कर मेरी हथेली

रात आधी खींच कर मेरी हथेली
एक उंगली से लिखा था प्यार तुमने।
फ़ासला था कुछ हमारे बिस्तरों में
और चारों ओर दुनिया सो रही थी।
तारिकाऐं ही गगन की जानती हैं
जो दशा दिल की तुम्हारे हो रही थी।
मैं तुम्हारे पास होकर दूर तुमसे
अधजगा सा और अधसोया हुआ सा।
रात आधी खींच कर मेरी हथेली
एक उंगली से लिखा था प्यार तुमने।
एक बिजली छू गई सहसा जगा मैं
कृष्णपक्षी चाँद निकला था गगन में।
इस तरह करवट पड़ी थी तुम कि आँसू
बह रहे थे इस नयन से उस नयन में।
मैं लगा दूँ आग इस संसार में
है प्यार जिसमें इस तरह असमर्थ कातर।
जानती हो उस समय क्या कर गुज़रने
के लिए था कर दिया तैयार तुमने!
रात आधी खींच कर मेरी हथेली
एक उंगली से लिखा था प्यार तुमने।
प्रात ही की ओर को है रात चलती
औ उजाले में अंधेरा डूब जाता।
मंच ही पूरा बदलता कौन ऐसी
खूबियों के साथ परदे को उठाता।
एक चेहरा सा लगा तुमने लिया था
और मैंने था उतारा एक चेहरा।
वो निशा का स्वप्न मेरा था कि अपने
पर ग़ज़ब का था किया अधिकार तुमने।
रात आधी खींच कर मेरी हथेली
एक उंगली से लिखा था प्यार तुमने।
और उतने फ़ासले पर आज तक
सौ यत्न करके भी न आये फिर कभी हम।
फिर न आया वक्त वैसा
फिर न मौका उस तरह काफिर न लौटा चाँद निर्मम।
और अपनी वेदना मैं क्या बताऊँ।
क्या नहीं ये पंक्तियाँ खुद बोलती हैं?
बुझ नहीं पाया अभी तक उस समय जो
रख दिया था हाथ पर अंगार तुमने।
रात आधी खींच कर मेरी हथेली
- बच्चन


(बच्चन जी की यह कविता एक प्रेमी की व्यथा वेदना और विवशता को व्यक्त करती है)

12 comments:

  1. चिट्ठा जगत में आपका स्वागत है...शुभकामनायें.

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  2. सुंदर अति सुंदर लिखते रहिये .......
    आपकी अगली पोस्ट का इंतजार रहेगा
    htt:\\ paharibaba.blogspost.comm

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  3. बच्चन जी की भाव पूर्ण रचना...............पहली बार पढ़ी है.......बहूत सुन्दर

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  4. उजाले को पी अपने को उर्जावान बना
    भटके लोगो को सही रास्ता दीखा
    उदास होकर तुझे जिंदगी को नही जीना
    खुला गगन सबके लिए है , कभी मायूश न होना
    तुम अच्छे हो, खुदा की इस बात को सदा याद रखना....
    .......शुभकामनायें.

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  5. बहुत सुंदर…..आपके इस सुंदर से चिटठे के साथ आपका ब्‍लाग जगत में स्‍वागत है…..आशा है , आप अपनी प्रतिभा से हिन्‍दी चिटठा जगत को समृद्ध करने और हिन्‍दी पाठको को ज्ञान बांटने के साथ साथ खुद भी सफलता प्राप्‍त करेंगे …..हमारी शुभकामनाएं आपके साथ हैं।

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  6. बहुत अच्छी लगी पढ़कर ...शुक्रिया

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  7. ब्लॉग जगत में और चिठ्ठी चर्चा में आपका स्वागत है . आज आपके ब्लॉग की चर्चा समयचक्र में ..

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  8. हिन्दी चिटठा जगत में आपका स्वागत है , ऐसे ही अपनी लेखनी से हमें परिचित करते रहें

    धन्यवाद
    मयूर दुबे
    अपनी अपनी डगर

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  9. बहुत सुन्दर कविता है ...मन को छू गई

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  10. आपका हिंदी ब्लॉग की दुनिया में स्वागत है... और श्री हनुमान जी की जयंती पर आपको हार्दिक शुभकामनाएं.....

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  11. आप सभी के द्वारा दिए गए प्रोत्साहन और उत्साहवर्धन के लिए धन्यवाद | प्रयास रहेगा की आप सभी सुधि जनों का मार्गदर्शन और सहयोग ऐसे ही मिलता रहेगा | धन्यवाद

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  12. Saans jaane bojh kaise jivan ka dhoti rahi
    Nayan bin ashru rahe par zindagi roti rahi.

    Ek mahal ke bistare pe sote rahe kutte billiyaan
    Dhoop me pichwaade ek bachchi choti soti rahi .

    Ek naajuk khwaab ka anzaam kuch easa hua
    Main tadapta raha idhar wo us taraf roti rahi

    Tang aakar Muflisi se khudkushi kar li magar
    Do ghaz qafan ko laash uski baat johati rahi

    Bookh gharibi,laachari ne umar tak peecha kiya
    Mehnat ke rookh par zardian tan pe phati dhoti rahi

    Aaj to us maa ne jaise - taise bachche sulaa diye
    Kal ki fikr par raat bhar daaman bhigoti rahi.

    “Deepak” basher ki khawahishon ka qad itna bad gaya
    Khawahishon ki bheed me kahi zindagi khoti rahi.
    @ Kavi Deepak Sharma
    http://www.kavideepaksharma.co.in
    http://www.shayardeepaksharma.blogspot.com

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